Readers' Feedback

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What Readers Say

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Great, such a wonderful quotes you wrote here in simple words, Thanks to share Sir

Sunil Nasir 30 Sep 2026

आपके संग्रह का प्रकाशित होने के लिए शुभकामनाएं। शायरी और खाली छत दोनों ही जिंदगी का आइना सा प्रतीत होती है आने वाले प्रकाशन का इंतजार रहेगा।

राज तक्षक 28 Sep 2026

शायरी का अंदाज़ और समझ दोनों ही लाजवाब हैं! एक मुद्दत के बाद शब्दों में इतनी गहराई और सलीका एक साथ देखने को मिला। 'खाली छत' महज़ एक कहानी नहीं, बल्कि ज़िंदगी का आईना लगती है। आपके साहित्यिक समंदर की नई लहरों से रूबरू होने का शिद्दत से इंतज़ार रहेगा।" मोहम्मद अरमान

मोहम्मद अरमान 24 Sep 2026

ये सिर्फ़ एक शायरी नहीं थी, बल्कि ज़िंदगी को देखने का मेरा नज़रिया बदल देने वाली कुछ पंक्तियाँ थीं। इसे पढ़ने के बाद एहसास हुआ कि ज़िंदगी को हम अक्सर जिस नज़र से देखते हैं, असलियत उससे कहीं अलग होती है। कुछ शब्द इतने गहरे होते हैं कि वो सिर्फ़ पढ़े नहीं जाते, महसूस किए जाते हैं। इस शायरी ने मुझे ज़िंदगी के बारे में सोचने का एक नया नज़रिया दिया। ❤️

Satyendra Gurjar 13 Sep 2026

आपकी शायरी दिल को छू जाती है। खाली छत पढ़ते हुए ऐसा लगा जैसे अपनी ही कहानी पढ़ रहा हूँ। हर पन्ने पर कुछ न कुछ अपना सा मिला।

Ramesh Kumar 28 Aug 2026

खाली छत was a wonderful read. The way you write about ordinary days and make them feel important is rare. Waiting for the next collection.

Sunita Mehra 19 Aug 2026

हर शेर में जिंदगी की सच्चाई है। आवारा अल्फाज मेरी सबसे पसंदीदा किताब बन गई है। बहुत बहुत शुक्रिया इतना अच्छा लिखने के लिए।

Aarti Sharma 11 Aug 2026

Good collection overall. I enjoyed दर्द बे दर्द the most. Would love to read more short stories alongside the poetry.

Devendra Singh 30 Jul 2026

I do not read much Hindi poetry but your words are simple enough to follow and deep enough to stay with me. Read the whole site in one evening.

Priya Nair 22 Jul 2026

खुराक़ ऐ ख्याल की कुछ नज़्में बार बार पढ़ीं। कुछ जगह और विस्तार होता तो और मज़ा आता, पर कुल मिलाकर बहुत उम्दा।

Mohit Verma 09 Jul 2026

आपको एक कार्यक्रम में सुना था और तभी से आपकी लिखी हर चीज़ पढ़ती हूँ। आवाज़ और अल्फाज़ दोनों में वही सच्चाई है।

Kavita Joshi 25 Jun 2026

The poems are good and honest. The website could do with a way to search inside the books, but the writing itself I enjoyed.

Anil Bhatia 14 Jun 2026

दर्द बे दर्द पढ़ते हुए कई बार रुकना पड़ा। कुछ पंक्तियाँ सीधे दिल पर लगती हैं। मैंने अपनी बहन को भी यह किताब भेजी है।

Shalini Gupta 30 May 2026

Simple words, big feelings. That is what I liked. Please keep posting new quotes, I share them with my friends every week.

Rakesh Yadav 16 May 2026

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